डेस्टिनेशन वेडिंग और करोड़ों के खर्च के बजाय राजस्थान के युवा ने चुने देसी संस्कार- 15 से ज्यादा देशों के मेहमानों को दिखाया असली भारत, राजसी नहीं—रिवायती स्वागत- युवा स्टार्टअप फाउंडर अंकित जैन की शादी बनी मिसालउदयपुर। एक ओर जहां डेस्टिनेशन वेडिंग और बिग फैट वेडिंग ट्रेंड बन चुकी हैं और लोग केवल लाखों – करोड़ों खर्च कर रहे हैं, वहीं 1 शादी ऐसी भी है जो पूरी सादगी और परम्पराओं के साथ की गई। इसमें कई देशों से मेहमान भी आए लेकिन उनकी आवभगत लगजुरियस होटलों नहीं बल्कि ठेठ देसी अंदाज में हो हुई। इस शादी में भारतीय परम्परा और संस्कृति को सबसे ऊपर रखते हुए इन्हीं से विदेशी मेहमानों को रूबरू कराया गया। ये सोच थी दूल्हे अंकित जैन की।
भारत की असली संस्कृति और परम्पराओं से कराया रूबरू
अंकित का उदयपुर में एक स्टार्टअप है और अब तक वे कई देशों में अपने स्टार्टअप के झंडे गाड़ चुके हैं। वे जिस भी देश में गए वहीं दोस्त बना लिए। अब जब वे ज़िंदगी का 1 नया अध्याय शुरू करने जा रहे हैं तो उनकी सोच थी कि विदेशी लोग असली भारत को और यहां की संस्कृति और परम्परा को देखें। बड़ी-बड़ी रॉयल वेडिंग्स की चर्चा दुनिया में जरूर होती है लेकिन असली परम्परा और संस्कृति गांव की शादियों में होती है। इसलिये उन्होंने भी अपने पैतृक गांव टोंक के डिग्गी मालपुरा से शादी का फैसला किया। उनकी इस शादी में 15 से अधिक देशों से मेहमान आए जिनका स्वागत और मेहमान नवाजी पारंपरिक तरीकों से हुई। साथ ही उन्होंने देसी संस्कृति और शादी के रीति-रिवाजों का आनंद उठाया।
गांव की चौखट पर उतरी दुनिया
अंकित की सोच एकदम साफ थी—“अगर दुनिया को भारत दिखाना है, तो पैलेस नहीं, गांव दिखाओ।”इसी सोच के साथ उन्होंने अपनी शादी के लिए गांव की देसी शादी और परम्परा दिखाई। विदेशी मेहमानों ने शहनाइयों की धुन, हल्दी की खुशबू और लोकगीतों की लय में भारत को जीया। अंकित जैन का मानना है कि अगर किसी को भारत दिखाना है, तो बड़े महलों या होटल नहीं, बल्कि गांव की असली संस्कृति दिखानी चाहिए। विदेशी मेहमानों ने भी इस देसी शादी को खूब पसंद किया। भोजन भी पारंपरिक और देसी रखा गया जिसे खाकर उन्हें स्वाद आ गया। यह शादी उन सभी के लिए मिसाल है जो आजकल बिग फैट वेडिंग कर शदियों को ग्लोबल बिजनेस बना चुके हैं। भारत की शादी परम्पराओं में लिपटी जीवन की सौगात है और इसे खुशनुमा और यादगार पल बनाने के लिए महंगे खर्च नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति और परंपराओं की जरूरत होती है।