एलपीजी की बढ़ती कीमतों के बीच सोलर कुकर भी है ईको फ्रेंडली विकल्प, हजारों महिलाओं को दे चुकी हैं सोलर कुकिंग का प्रशिक्षण
जीवीआई नेटवर्क। वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतों में तेजी और खासकर मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब आम रसोई तक पहुंचने लगा है। देश में एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी और कमर्शियल गैस की किल्लत के कारण कई रेस्टोरेंट, छोटे होटल और ठेला व्यवसायी मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में लोग गैस के विकल्प तलाशने लगे हैं। इंडक्शन चूल्हों की मांग तेजी से बढ़ी है, लेकिन इसके साथ ही एक प्राकृतिक और किफायती विकल्प सोलर कुकर भी फिर से चर्चा में है। लेकसिटी उदयपुर की 70 वर्षीय डॉ. मंजू जैन पिछले 42 वर्षों से सौर ऊर्जा के जरिए भोजन तैयार कर रही हैं। अरविंद नगर, सुंदरवास निवासी डॉ. जैन न केवल खुद सोलर कुकर अपनाए हुए हैं, बल्कि इसे जन-जन तक पहुंचाने का अभियान भी चला रही हैं। पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा बचत के प्रति उनके योगदान के चलते उन्हें ‘सोलर वुमन’ के नाम से जाना जाता है और वे प्लेटिनम शक्ति पुरस्कार से सम्मानित भी हो चुकी हैं।
गैस और बिजली का विकल्प बना सोलर कुकर

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतों में उछाल का सीधा असर भारत में एलपीजी कीमतों पर पड़ा है। इंडक्शन चूल्हों की मांग जरूर बढ़ी है, लेकिन बिजली पर निर्भरता एक नई चुनौती है। ऐसे में सोलर कुकर एक किफायती, टिकाऊ और ईको-फ्रेंडली विकल्प बनकर उभर रहा है।
परिवार से शुरू हुई यात्रा, समाज तक पहुंची सोच
पेशे से होम्योपैथिक डॉक्टर रहीं डॉ. मंजू जैन ने परिवार की देखभाल के लिए अपनी प्रैक्टिस छोड़ दी। इसी दौरान सोलर कुकर उनके जीवन का हिस्सा बना। बिना गैस, लकड़ी या बिजली के भोजन तैयार करने की सुविधा ने न केवल उनके काम को आसान बनाया, बल्कि उन्हें एक नई दिशा भी दी।

हजारों महिलाओं को सिखाई सोलर कुकिंग
डॉ. जैन अब तक 1000 से अधिक महिलाओं और युवतियों को सोलर कुकर में भोजन बनाने का प्रशिक्षण दे चुकी हैं। उनके प्रशिक्षण में दाल-बाटी, कढ़ी-लप्सी, इडली-सांभर, चावल, केक, समोसा, खमण, कुकीज, छोले-राजमा जैसे कई व्यंजन शामिल हैं। वे ऑल इंडिया रेडियो पर सोलर कुकिंग पर वार्ता भी दे चुकी हैं और स्कूलों, कॉलेजों व सामाजिक संस्थाओं में लगातार जागरूकता अभियान चला रही हैं।