पहले क्लासरूम में पढ़ाई फिर खेतों में बुआई, जुताई, उदयपुर की गोल्ड मेडलिस्ट प्रोफेसर कर रहीं किसानी

hansa nyati


ऑर्गेनिक खेती कर उगा रहीं फल-सब्जियां, पति— बेटा भी दे रहे साथ

जीवीआई नेटवर्क। जहां ज़्यादातर लोग खेती को पेशा छोड़ने की सोचते हैं, वहीं उदयपुर की प्रोफेसर हंसा न्याति ने इसे जीवन का उद्देश्य बना लिया है। इकोनॉमिक्स की गोल्ड मेडलिस्ट, राष्ट्रीय स्तर की शिल्पकार और एक प्राइवेट कॉलेज की प्रोफेसर हंसा न्याति आज मावली स्थित अपने 8 एकड़ के फार्म पर पूरी तरह जैविक तरीके से फल, सब्ज़ियाँ और मसालों का उत्पादन कर रही हैं। उनका लक्ष्य सिर्फ खेती नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और लोगों को शुद्ध भोजन उपलब्ध कराना है।हंसा न्याति की यह यात्रा किसी स्टार्टअप स्टोरी से कम नहीं। दिल्ली में रहते हुए उन्होंने स्कल्पचर आर्ट सीखा, कई प्रदर्शनियाँ कीं, लेकिन परिवार और बच्चों की ज़िम्मेदारी के चलते उन्होंने जॉब से ब्रेक लिया। उदयपुर लौटने के बाद बोहरा गणेशजी क्षेत्र में खाली प्लॉट्स पर प्रयोग के तौर पर खेती शुरू की और यहीं से ऑर्गेनिक जीवनशैली की नींव पड़ी। बाद में मावली में फार्म हाउस लेकर इसे प्रोफेशनल स्तर पर आगे बढ़ाया।

मां से मिला जैविक सोच का संस्कार
57 वर्षीय हंसा बताती हैं कि ऑर्गेनिक खेती का पहला सबक उन्होंने अपनी मां से सीखा था। उनकी मां घर पर ही फल-सब्ज़ियाँ उगाती थीं और धूप में सुखाकर उन्हें संरक्षित करती थीं। आज जब केमिकल खेती से स्वाद और सेहत दोनों प्रभावित हो रहे हैं, तो हंसा ने उसी पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक संदर्भ में अपनाया। उनका मानना है कि कम से कम 100 परिवारों तक शुद्ध और सुरक्षित भोजन पहुँचना चाहिए, यही उनकी असली सफलता होगी।

2000 से ज्यादा फलदार पेड़, देसी-विदेशी सब्ज़ियों की भरमार
उनके फार्म पर अनार, नींबू, अमरूद, आम, चीकू, आंवला, जामुन जैसे 2000 से अधिक फलदार पेड़ हैं। इसके साथ ही पार्सले, सेलेरी, लेट्यूस, बेल पेपर, पर्पल कैबेज, शिमला मिर्च जैसी देसी और विदेशी सब्ज़ियाँ भी बिना किसी रासायनिक खाद के उगाई जा रही हैं। उनके पति डॉ. गिरिराज न्याति टेक्नोएनजेआर इंस्टीट्यूट में एसोसिएट डायरेक्टर हैं, बेटा राघव उदयपुर में और पार्थ चेन्नई में अमेज़न में कार्यरत हैं।

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