चार धाम यात्रा 19 अप्रैल 2026 से होगी शुरू,cहेलीकॉप्टर राइड और होटल बुकिंग के नाम पर साइबर फ्रॉड बढ़ा। जानिए कैसे बचें और सुरक्षित बुकिंग के तरीके।
जीवीआई नेटवर्क। अक्षय तृतीया के पावन अवसर से चार धाम यात्रा की शुरुआत हो जाती है। इस बार 19 अप्रेल से ये यात्रा शुरू होने जा रही है। अगर आप भी चार धाम यात्रा पर जाने की प्लानिंग कर रहे हैं तो जरा संभलकर। इस धार्मिक यात्रा की पवित्र राह पर एक अदृश्य खतरा भी साथ चल रहा है—डिजिटल ठगी का। आस्था के इस महापर्व में जहां लाखों श्रद्धालु भगवान के दर्शन की तैयारी में जुटे हैं, वहीं साइबर अपराधी इसी भावना को अपना हथियार बना रहे हैं। भगवान के दर्शनों के इच्छुक लोग जल्दबाजी में बुकिंग्स करा लेते हैं और इसी दौरान उनके साथ ठगी हो जाती है जिसकी जानकारी उन्हें सब कुछ खोने के बाद होती है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के साइबर विंग I4C ने इसे गंभीरता से लेते हुए देशभर के यात्रियों के लिए अलर्ट जारी किया है। विशेष रूप से हेलीकॉप्टर राइड और होटल बुकिंग के नाम पर फर्जी वेबसाइट्स, सोशल मीडिया विज्ञापन और तथाकथित “ऑथराइज्ड एजेंट्स” के जरिए ठगी की घटनाएं सामने आने के बाद सावधानी बरतने को कहा गया है। दरअसल, साइबर ठग यात्रा के लुभावने आॅफर्स देकर पहले भरोसा बनाते हैं, फिर “सीमित सीटें” या “अंतिम मौका” जैसे शब्दों से जल्द निर्णय लेने का दबाव बनाते हैं—और इसी जल्दबाजी में लोग अपनी मेहनत की कमाई और निजी जानकारी दोनों गंवा बैठते हैं।
जज से ठगी का मामला आया सामने, 1 लाख से ज्यादा गंवाए
चारधाम यात्रा के लिए हाल ही मध्य प्रदेश के जबलपुर में एक जज को भी साइबर जालसाजों ने शिकार बनाया। दरअसल, चारधाम यात्रा करने के लिए ऑनलाइन बुकिंग का एक ऐड देखा और उसके बाद जालसाजों के चक्कर में फंसकर इंदौर के एक जज के एक लाख से ज्यादा ठग लिए गए। इसकी एफआईआर भी दर्ज की गई है, और उसके बाद लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसमें साइबर ठग ने व्हाट्सएप पर चारधाम यात्रा का विवरण भेजा, उसके बदले उन्होंने 100000 लाख रुपए जमा करने के लिए कहा गया। जज ने टिकट और अन्य बुकिंग के लिए जालसाजों के खाते में 1 लाख 7000 रुपए ट्रांसफर कर दिए थे, भुगतान के लिए भेजी यूपीआई आईडी को भी फेक तरीके से साइबर क्रिमिनल्स ने उनके पास भेजा था। जानकारी मिलने के बाद इस पर एक्शन लिया जा रहा है और बड़े स्तर पर कार्रवाई की जा रही है। दरअसल, असली साइबर फ्रॉड्स असली जैसी दिखने वाली वेबसाइट्स तैयार करते हैं, जिनके नाम और डिजाइन लगभग आधिकारिक पोर्टल जैसे होते हैं। इसके अलावा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर आकर्षक विज्ञापन देकर लोगों को क्लिक करने के लिए प्रेरित किया जाता है। कई बार फर्जी कॉल या मैसेज के जरिए खुद को अधिकृत एजेंट बताकर एडवांस पेमेंट मांगा जाता है। यही नहीं, सर्च इंजन पर दिखाई देने वाला पहला लिंक भी हमेशा विश्वसनीय हो—यह जरूरी नहीं। कई बार ठग पैसे देकर अपने फर्जी लिंक को ऊपर दिखा देते हैं, जिससे लोग भ्रमित हो जाते हैं।
सुरक्षित यात्रा के लिए ये करें
-विशेषज्ञों का कहना है कि सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।
– हमेशा केवल सरकारी और अधिकृत वेबसाइट्स से ही बुकिंग करें
– रजिस्ट्रेशन के लिए केवल “gov.in” डोमेन वाली आधिकारिक साइट का ही उपयोग करें
– हेलीकॉप्टर सेवा के लिए अधिकृत प्लेटफॉर्म जैसे IRCTC HeliYatra Portal पर ही भरोसा करें ‘
-सोशल मीडिया विज्ञापनों या अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें
– किसी भी एजेंट को बिना पूरी जांच-पड़ताल के भुगतान न करें
-ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए ऋषिकेश, हरिद्वार और देहरादून के अधिकृत केंद्रों का ही सहारा लें।
- ठगी का शिकार होने पर तुरंत करें ये काम
- – यदि किसी भी तरह की साइबर धोखाधड़ी का संदेह हो या आप इसका शिकार हो जाएं, तो बिना देरी किए कार्रवाई करें।
- – तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।
एक्सपर्ट की राय—

“केदारनाथ यात्रा 2026 के दौरान हर साल की तरह इस बार भी साइबर ठगी के मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। ठग खासतौर पर हेलीकॉप्टर बुकिंग और सस्ते होटल के नाम पर फर्जी वेबसाइट्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बना रहे हैं।
मेरी सभी श्रद्धालुओं से अपील है कि वे केवल IRCTC की आधिकारिक वेबसाइट https://heliyatra.irctc.co.in के माध्यम से ही बुकिंग करें। इसके अलावा जो भी वेबसाइट या एजेंट मिलते हैं, वे ज्यादातर फर्जी होते हैं और लोगों को आर्थिक नुकसान पहुंचा सकते हैं।
सस्ते होटल या हेलीकॉप्टर के लालच में बिल्कुल न पड़ें और किसी भी अनजान व्यक्ति या एजेंट के बैंक खाते में एडवांस पेमेंट न करें। बुकिंग करने से पहले वेबसाइट का URL ध्यान से जरूर चेक करें, क्योंकि फर्जी साइट्स बिल्कुल असली जैसी दिखाई देती हैं।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कोई भी असली या आधिकारिक प्लेटफॉर्म कभी भी WhatsApp या पर्सनल नंबर पर पेमेंट नहीं मांगता। यदि आपसे इस तरह की मांग की जाती है, तो तुरंत सतर्क हो जाएं और भुगतान न करें। अगर किसी के साथ साइबर फ्रॉड हो जाता है, तो बिना देरी किए तुरंत 1930 पर कॉल करें और शिकायत दर्ज करवाएं, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके और नुकसान को रोका जा सके। थोड़ी सी जागरूकता और सावधानी से हम इस तरह के साइबर फ्रॉड से बच सकते हैं।”
— श्याम चंदेल, साइबर एक्सपर्ट