— मास्टर शेफ सीजन-9 में बेटी-पिता की जोड़ी ने शेफ्स रणवीर, कुणाल और विकास को किया भावुक
— पार्किंसंस के बावजूद किचन में कदम रखते ही भूल जाती हैं सारी परेशानियां, शेफ्स ने जज्बे को किया सलाम
उदयपुर।
खाना बनाना केवल हाथों का हुनर नहीं होता, जब इसमें जज्बात, प्यार और जुनून मिल जाए तो यह असंभव को भी संभव बना देता है। ऐसा ही जादू देखने को मिला उदयपुर की 29 वर्षीय मनीषा शर्मा के साथ, जो सेकंडरी पार्किंसंस से जूझने के बावजूद कुकिंग के जरिए जिंदगी को पूरी ताकत से जी रही हैं।
मनीषा अपने पिता रतनलाल शर्मा के साथ रियलिटी शो मास्टर शेफ सीजन-9 के मंच पर पहुंचीं और अपने संघर्ष व जुनून से सभी को भावुक कर दिया।
14 साल की उम्र में कोमा, फिर पार्किंसंस से जंग
मास्टर शेफ किचन में जब मनीषा ने अपनी कहानी साझा की तो शेफ्स कुणाल कपूर, रणवीर बरार और विकास खन्ना भी स्तब्ध रह गए। मनीषा ने बताया कि वे 14 साल की उम्र में कोमा में चली गई थीं, जिसके बाद उन्हें सेकंडरी पार्किंसंस होने का पता चला। इस कठिन सफर में उनके पिता रतनलाल और मां सरिता शर्मा ने हर कदम पर साथ दिया।
कुकिंग बना जिंदगी का सहारा
मनीषा ने बताया कि कुकिंग कब उनका पैशन बन गई, उन्हें खुद भी पता नहीं चला। लेकिन इसी ने उन्हें जिंदगी का एक मकसद दिया। वे उदयपुर के कई कैफे और होटलों में काम कर चुकी हैं और अब उनका सपना अपना खुद का कैफे खोलने का है।
मनीषा का कहना है कि किचन में कदम रखते ही उनकी सारी समस्याएं पीछे छूट जाती हैं और वे पूरे मन से खाना बनाती हैं।
खीर से जीता दिल
मास्टर शेफ मंच पर मनीषा ने शेफ्स के सामने खीर का लाइव लास्ट टच-अप किया और डिश सर्व की। उनका आत्मविश्वास और जज्बा देखकर तीनों जजेज ने खुले दिल से तारीफ की और उनके संघर्ष को सलाम किया।
‘मैजिकल मिनी’ नाम और शेफ कोट का सम्मान
हालांकि मनीषा प्रतियोगिता में आगे नहीं बढ़ पाईं, लेकिन शेफ विकास खन्ना, रणवीर बरार और कुणाल कपूर ने उन्हें ‘मैजिकल मिनी’ का नाम दिया और सिग्नेचर व शुभकामनाओं के साथ शेफ कोट पहनाकर सम्मानित किया।
मनीषा ने इसे अपनी जिंदगी का सबसे यादगार पल बताया।
परिवार और दोस्तों का साथ
मनीषा का कहना है कि इस सफर में माता-पिता, भाई गौरव, कुकिंग टीचर निर्मला सोनी के साथ-साथ दोस्त अभिराज, पलक और विनय का भी बड़ा योगदान रहा, जिन्होंने हर वक्त उनका हौसला बढ़ाया।


