17 साल की उम्र में घर छोड़कर निकल पड़े थे भारत घूमने, लौटे तो बदली जिंदगी की दिशा… PM Modi Birthday पर जानिए 10 रोचक किस्से
17 साल की उम्र में घर छोड़कर भारत घूमने निकले नरेंद्र मोदी करीब दो साल बाद लौटे तो जिंदगी का लक्ष्य बदल चुका था। PM Modi Birthday पर जानिए उनके जीवन के 10 रोचक किस्से।
जीवीआई नेटवर्क। कल्पना कीजिए… उम्र सिर्फ 17 साल, सामने जिंदगी का कोई तय रास्ता नहीं और एक दिन घर छोड़कर निकल पड़ना—पूरा भारत देखने के लिए। गुजरात के वडनगर से निकला एक किशोर करीब दो वर्षों तक भारत के अलग-अलग हिस्सों में घूमता रहा। अलग-अलग संस्कृतियों और लोगों को करीब से देखा और जब वापस लौटा तो वह पहले वाला किशोर नहीं था। प्रधानमंत्री कार्यालय की आधिकारिक जीवनी के अनुसार, इस यात्रा के बाद उसके जीवन का लक्ष्य पहले से कहीं अधिक स्पष्ट था। यही किशोर आगे चलकर देश का प्रधानमंत्री बना।यह कहानी है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की, जिनका जन्म 17 सितंबर 1950 को गुजरात के वडनगर में हुआ था। आज उनके 76वें जन्मदिन पर उनके राजनीतिक जीवन की बजाय नजर डालते हैं उनके जीवन के उन पहलुओं पर, जो उनकी कहानी को अलग बनाते हैं।
17 साल की उम्र में छोड़ दिया था घर
नरेंद्र मोदी के जीवन का शायद सबसे दिलचस्प अध्याय उनकी किशोरावस्था से जुड़ा है। PMO की आधिकारिक जीवनी के मुताबिक, 17 वर्ष की उम्र में उन्होंने घर छोड़ दिया और करीब दो वर्षों तक भारत के विभिन्न हिस्सों की यात्रा की। इस दौरान उन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों, संस्कृतियों और जीवनशैलियों को करीब से देखा। लौटने के बाद उनके जीवन की दिशा बदल चुकी थी और उन्होंने सार्वजनिक जीवन की ओर कदम बढ़ाया।यही वह यात्रा थी जिसने उनके जीवन की कहानी में एक नया अध्याय शुरू किया।
वडनगर के छोटे से घर से शुरू हुई कहानी
नरेंद्र मोदी का जन्म गुजरात के मेहसाणा जिले के वडनगर में हुआ। PMO की जीवनी के अनुसार, उनका परिवार सीमित आर्थिक संसाधनों वाले एक छोटे से घर में रहता था। बचपन में उन्होंने परिवार की चाय की दुकान पर भी काम में हाथ बंटाया। यानी जिस व्यक्ति की आज की दिनचर्या देश और दुनिया की बड़ी बैठकों के बीच गुजरती है, उसके बचपन की तस्वीर एक छोटे कस्बे और चाय की दुकान से जुड़ी रही है।
किताबों और वाद-विवाद का था शौक
बचपन से ही नरेंद्र मोदी की रुचि पढ़ने और वाद-विवाद में बताई जाती है। PMO की जीवनी में उनके स्कूल के साथियों के हवाले से बताया गया है कि उन्हें किताबें पढ़ने में रुचि थी और वे स्थानीय पुस्तकालय में काफी समय बिताते थे। बचपन में उन्हें तैराकी का भी शौक था।
स्वामी विवेकानंद के विचारों का पड़ा प्रभाव

किशोरावस्था और युवावस्था में नरेंद्र मोदी स्वामी विवेकानंद के विचारों से प्रभावित हुए। PMO की आधिकारिक जीवनी के अनुसार, विवेकानंद के विचारों ने उनके आध्यात्मिक झुकाव और समाज के लिए कुछ करने की सोच को प्रभावित किया।
भारत घूमकर लौटे तो अहमदाबाद पहुंचे
भारत यात्रा के बाद नरेंद्र मोदी अहमदाबाद पहुंचे और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े।PMO के अनुसार, 1972 में वे RSS के प्रचारक बने। इस दौरान उनकी दिनचर्या काफी अनुशासित और व्यस्त रही—सुबह जल्दी शुरू होने वाला दिन देर रात तक चलता था।
स्वतंत्र भारत में जन्म लेने वाले पहले प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को हुआ था—भारत की स्वतंत्रता के तीन वर्ष बाद। PMO के अनुसार, वे स्वतंत्र भारत में जन्म लेने वाले पहले प्रधानमंत्री हैं। यह तथ्य उनके जन्म वर्ष को भारत के राजनीतिक इतिहास से सीधे जोड़ता है।
गुजरात के मुख्यमंत्री बनने तक का सफर
संगठनात्मक राजनीति में वर्षों काम करने के बाद नरेंद्र मोदी अक्टूबर 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री बने। उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में करीब 13 वर्षों तक काम किया और मई 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद मुख्यमंत्री पद छोड़ा।
8. प्रधानमंत्री बनने से पहले नहीं रहे केंद्रीय मंत्री
नरेंद्र मोदी के राजनीतिक सफर की एक उल्लेखनीय बात यह है कि 2014 में प्रधानमंत्री बनने से पहले उन्होंने केंद्र सरकार में केंद्रीय मंत्री के रूप में काम नहीं किया था। उनका अनुभव मुख्य रूप से संगठनात्मक राजनीति और गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में रहा।
9. तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ
नरेंद्र मोदी ने 2014 में पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली, इसके बाद 2019 में दूसरी बार और 9 जून 2024 को तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। 2024 में लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद संभालने के साथ उनके राष्ट्रीय राजनीतिक जीवन का एक नया अध्याय शुरू हुआ।
10. आज भी यात्रा और लोगों से जुड़ने की बात करते हैं
भारत की यात्रा उनके जीवन का शुरुआती हिस्सा रही, लेकिन देश को करीब से देखने का अनुभव उनके सार्वजनिक वक्तव्यों में भी दिखाई देता है। एक पुराने TIME इंटरव्यू में मोदी ने कहा था कि उन्होंने चार दशकों से अधिक समय में भारत के विभिन्न हिस्सों की यात्रा की है और 400 से अधिक जिलों में रात बिताई है। वहीं 2025 में उद्यमी निखिल कामथ के साथ बातचीत में उन्होंने अपने शुरुआती वर्षों, घर छोड़ने और पुराने दोस्तों से दोबारा जुड़ने के अनुभव भी साझा किए थे।