Durga Puja 2026: कोलकाता की तरह यहां भी सजते हैं दुर्गा पांडाल, 70 सालों से हो रही मां दुर्गा की आराधना
उदयपुर में 16 से 21 अक्टूबर तक बंगाली समाज की दुर्गा पूजा की धूम रहेगी। बिंदु भवन में 71वीं और काली बाड़ी सोसायटी में 35वीं दुर्गा पूजा आयोजित होगी। महाअष्टमी पर 108 कमल पुष्पों से पूजा और विजयादशमी पर पारंपरिक सिंदूर खेला आकर्षण का केंद्र रहेंगे।
Gvi नेटवर्क। कोलकाता की भव्य दुर्गा पूजा और बंगाल की पारंपरिक संस्कृति की झलक अब उदयपुर में भी देखने को मिलेगी। शारदीय नवरात्र के बीच शहर का बंगाली समाज मां दुर्गा की आराधना के लिए तैयार है। शुक्रवार, 16 अक्टूबर से अशोक नगर स्थित बिंदु भवन और हिरणमगरी सेक्टर-4 स्थित काली बाड़ी सोसायटी में दुर्गा पूजा महोत्सव के विशेष अनुष्ठान शुरू होंगे। पूजा पंडालों में पारंपरिक विधि-विधान, पुष्पांजलि, भोग-प्रसाद, संध्या आरती और हवन के साथ मां दुर्गा की आराधना की जाएगी।

उदयपुर में 71वीं दुर्गा पूजा, 1956 से निभाई जा रही परंपरा
अशोक नगर स्थित बिंदु भवन, 49 शास्त्री मार्ग पर इस वर्ष 71वीं श्रीश्री दुर्गा महापूजा का आयोजन 16 से 21 अक्टूबर तक किया जाएगा। छह दिवसीय महोत्सव की शुरुआत षष्ठी पूजा से होगी और विजयादशमी पर धार्मिक अनुष्ठानों के साथ समापन होगा।
उदयपुर में दुर्गा पूजा की शुरुआत वर्ष 1956 में दिवंगत नृपेंद्र लाल भट्टाचार्य और उनकी पत्नी शोभा देवी ने की थी। वर्ष 1956 से 2000 तक बिंदु भवन में इस परंपरा का आयोजन हुआ। इसके बाद उनके पुत्र अपूर्व भट्टाचार्य, गौतम भट्टाचार्य और अपूर्व की पत्नी अंजलि देवी ने इसे आगे बढ़ाया। वर्ष 2013 से अंजलि देवी, उनकी पुत्री इंद्रा भट्टाचार्य और परिवार के अन्य सदस्यों के सहयोग से पूजा आयोजित की जा रही है।
आयोजन के दौरान षष्ठी पूजा, सप्तमी के अनुष्ठान, पुष्पांजलि, संध्या आरती, हवन और विजयादशमी पर विसर्जन सहित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम होंगे।
काली बाड़ी सोसायटी में 35वां दुर्गा पूजा महोत्सव
हिरणमगरी सेक्टर-4 स्थित ब्राह्मण समाज समिति परिसर में बंगाली काली बाड़ी सोसायटी की ओर से दुर्गा पूजा महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन अपने 35वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है।
सोसायटी अध्यक्ष डॉ. दीपांकर चक्रवर्ती के अनुसार, षष्ठी के दिन बोधन, आमंत्रण और अधिवास के साथ पूजा शुरू होगी। इसके बाद सप्तमी की पूजा, पुष्पांजलि, भोग और संध्या आरती होगी।
महाअष्टमी पर विशेष संधि पूजा के दौरान मां दुर्गा को 108 कमल पुष्प अर्पित किए जाएंगे। महानवमी पर भी धार्मिक अनुष्ठान होंगे। विजयादशमी पर दर्पण पूजा और अपराजिता पूजा के बाद महिलाएं पारंपरिक सिंदूर खेला करेंगी। इसके बाद मां दुर्गा की प्रतिमा की विसर्जन यात्रा निकाली जाएगी।
आस्था के साथ बंगाली संस्कृति का संगम
उदयपुर में दुर्गा पूजा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि बंगाली समाज की सांस्कृतिक पहचान और सामूहिक परंपराओं से जुड़ा उत्सव भी है। पूजा पंडालों में पारंपरिक अनुष्ठानों, भोग-प्रसाद और संध्या आरती के माध्यम से बंगाल की सांस्कृतिक विरासत जीवंत होती है।
बिंदु भवन में सात दशकों से अधिक समय से निभाई जा रही परंपरा और काली बाड़ी सोसायटी का आयोजन शहर की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाते हैं। दुर्गा पूजा के इन आयोजनों में श्रद्धालु मां दुर्गा की आराधना के साथ परंपरा, आस्था और सामुदायिक एकता का अनुभव करेंगे।