उदयपुर के जनजातीय क्षेत्र धार गांव की बेटियों ने सीमित संसाधनों के बावजूद Lacrosse में अपनी अलग पहचान बनाई है। गांव के मैदान से India की Jersey तक पहुंचीं इन खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का तिरंगा लहराया। पढ़िए मेहनत, संघर्ष और सफलता की इन बेटियों की प्रेरक कहानी।
जीवीआई नेटवर्क। कभी जिस खेल का नाम भी उदयपुर के ग्रामीण और जनजातीय इलाकों में बहुत कम लोग जानते थे, आज उसी Lacrosse ने धार गांव की बेटियों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिला दी है। सीमित संसाधनों के बीच अभ्यास करने वाली इन खिलाड़ियों ने अपनी मेहनत, अनुशासन और जुनून के दम पर India की jersey पहनी और अंतरराष्ट्रीय मैदान पर देश का प्रतिनिधित्व किया।
हाल ही में कुआलालंपुर, मलेशिया में आयोजित अंतरराष्ट्रीय लैक्रोस प्रतियोगिता में भारतीय महिला टीम ने कांस्य पदक जीता। इस उपलब्धि में उदयपुर के जनजातीय क्षेत्र की नौ खिलाड़ियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। टीम की कप्तान डाली गमेती के साथ सुनीता मीणा, यशिष्ठा बत्रा, जुला कुमारी गुर्जर, मीरा दौजा, विशाखा मेघवाल, यशोदा गमेती, रोशनी बोस और जानवी राठौड़ भारतीय टीम का हिस्सा रहीं।
सिंगापुर के खिलाफ रोमांचक मुकाबले में जीता Bronze
भारतीय टीम ने प्रतियोगिता में शानदार शुरुआत करते हुए मेजबान मलेशिया को 27-3 और फिलीपींस को 20-2 से हराया। कांस्य पदक के मुकाबले में भारत का सामना सिंगापुर से हुआ, जहां टीम ने रोमांचक मुकाबले में 10-9 से जीत दर्ज कर Bronze Medal अपने नाम किया। यह सिर्फ एक पदक नहीं था। यह उन बेटियों के लिए एक संदेश था कि प्रतिभा गांव में पैदा हो सकती है, लेकिन उसकी उड़ान की कोई सीमा नहीं होती।
धार से निकलीं बेटियां, पहुंचीं India Team तक
उदयपुर का जनजातीय क्षेत्र लंबे समय से खेल प्रतिभाओं के लिए जाना जाता रहा है। इसी क्षेत्र से निकलने वाली इन खिलाड़ियों ने लैक्रोस जैसे अपेक्षाकृत नए खेल में अपनी अलग पहचान बनाई है। इन खिलाड़ियों की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि उनके सामने महानगरों जैसी सुविधाएं और संसाधन हमेशा उपलब्ध नहीं थे। इसके बावजूद उन्होंने मैदान पर पसीना बहाया और लगातार राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में प्रदर्शन करते हुए भारतीय टीम तक जगह बनाई। 2026 की शुरुआत में भी उदयपुर के जनजातीय क्षेत्र के खिलाड़ियों ने Riyadh में आयोजित Asian Lacrosse Games में भारत की ऐतिहासिक सफलता में योगदान दिया। भारतीय टीम ने महिला और पुरुष दोनों वर्गों में Gold Medal जीते।
कोच नीरज बत्रा की भूमिका भी अहम
इन खिलाड़ियों की सफलता के पीछे लगातार प्रशिक्षण और मार्गदर्शन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। Coach Neeraj Batra ने उदयपुर के खिलाड़ियों को लैक्रोस की तकनीक और प्रतिस्पर्धात्मक खेल की बारीकियों से तैयार किया। मलेशिया की प्रतियोगिता में भी भारतीय महिला टीम ने उनके मार्गदर्शन में हिस्सा लिया।
अब उदयपुर में तैयार हो रही है नई Lacrosse Academy
इन सफलताओं ने उदयपुर को लैक्रोस के नए केंद्र के रूप में पहचान दिलाने की दिशा में भी रास्ता खोला है। उदयपुर में Lacrosse Academy स्थापित करने की पहल की जा रही है, जिसका उद्देश्य क्षेत्र की प्रतिभाओं को बेहतर प्रशिक्षण और सुविधाएं उपलब्ध कराना है। यानी धार की बेटियों की कहानी सिर्फ उनकी अपनी सफलता तक सीमित नहीं है। यह आने वाली पीढ़ी के लिए भी रास्ता बना रही है।
जब बेटियां लौटीं तो गांव ने किया दिल से स्वागत
अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता से पदक लेकर लौटने पर खिलाड़ियों का उदयपुर में भव्य स्वागत किया गया। रेलवे स्टेशन पर परिवारों, ग्रामीणों और खेल प्रेमियों ने फूल-मालाओं, आतिशबाजी और देशभक्ति के नारों के साथ खिलाड़ियों का अभिनंदन किया।