Young Innovator : पोस्चर बिगड़ते ही बजर से मिलेगा अलर्ट, स्कूल स्टूडेंट रूद्राक्ष ने तैयार किया कमाल का डिवाइस
उदयपुर के सेंट एंथनीज स्कूल के कक्षा 12 के छात्र रुद्राक्ष माथुर ने गलत पोस्चर पर अलर्ट देने वाली बजर युक्त बेल्ट बनाई। उनके इस नवाचार को INSPIRE-MANAK की राष्ट्रीय स्तरीय प्रदर्शनी में प्रदर्शित किया गया।
Gvi network। गलत तरीके से बैठने और खड़े होने की आदत को सुधारने के लिए उदयपुर के छात्र रुद्राक्ष माथुर ने एक अभिनव उपकरण तैयार किया है। सेंट एंथनीज सीनियर सेकेंडरी स्कूल के कक्षा 12 के छात्र रुद्राक्ष ने पोस्चर करेक्टिंग बेल्ट बनाई है, जो शरीर की मुद्रा गलत होने पर बजर के जरिए उपयोगकर्ता को सचेत करती है। इस नवाचार को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) और राष्ट्रीय नवप्रवर्तन प्रतिष्ठान (NIF-India) की ओर से आयोजित 12वीं राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनी एवं परियोजना प्रतियोगिता INSPIRE-MANAK में नई दिल्ली में प्रदर्शित किया गया। यह आयोजन 12 से 14 अक्टूबर 2026 तक हुआ।
विद्यालय के मीडिया प्रभारी विकास साहू के अनुसार, इस प्रोजेक्ट को मार्गदर्शक शिक्षक हिमांशु पंचोली के निर्देशन में तैयार किया गया। छात्र के इस प्रयास को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत किए जाने से विद्यालय और शहर का गौरव बढ़ा है।

कैसे काम करती है पोस्चर करेक्टिंग बेल्ट?
रुद्राक्ष की बनाई बेल्ट में तीन मजबूत नायलॉन पट्टियों का उपयोग किया गया है। ये पट्टियां नट-बोल्ट की मदद से एक केंद्रीय कवर से जुड़ी हैं। दो पट्टियां कंधों के ऊपर से गुजरती हैं, जबकि तीसरी पट्टी रीढ़ की हड्डी के साथ नीचे जाकर कमर की बेल्ट से जुड़ती है। यह संरचना बेल्ट को स्थिरता प्रदान करती है।
झुकते ही बजने लगता है अलार्म
इस बेल्ट की खासियत इसका इलेक्ट्रिक सर्किट और बजर है। केंद्रीय कवर में लगा स्विच बेल्ट पर पड़ने वाले खिंचाव के आधार पर सक्रिय होता है। जब उपयोगकर्ता झुककर बैठता या खड़ा होता है, तो स्विच सक्रिय होने से सर्किट पूरा होता है और बजर की आवाज सुनाई देती है। यह संकेत उपयोगकर्ता को अपनी मुद्रा सुधारने के लिए सतर्क करता है।
डिजिटल दौर की समस्या का अभिनव समाधान
आज बच्चे और युवा पढ़ाई, ऑनलाइन कक्षाओं, मोबाइल और कंप्यूटर के इस्तेमाल में लंबे समय तक बैठे रहते हैं। गलत मुद्रा में बैठने से गर्दन, कंधे और पीठ में असुविधा हो सकती है। रुद्राक्ष के अनुसार, उनकी बेल्ट का उद्देश्य उपयोगकर्ता को बार-बार अपनी मुद्रा के प्रति जागरूक करना और सही तरीके से बैठने-खड़े होने की आदत विकसित करने में मदद करना है।
हालांकि, यह उपकरण एक पोस्चर रिमाइंडर के रूप में काम करता है। इससे रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्याओं की रोकथाम या उपचार की गारंटी नहीं मानी जानी चाहिए।
प्राचार्य ने दी बधाई
विद्यालय के प्राचार्य विलियम डिसूजा ने रुद्राक्ष को इस उपलब्धि पर बधाई दी। विद्यालय परिवार ने उनके नवाचार और वैज्ञानिक सोच की सराहना की। INSPIRE-MANAK जैसे मंच विद्यार्थियों को दैनिक जीवन की समस्याओं के लिए विज्ञान आधारित समाधान विकसित करने और अपने विचार राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने का अवसर देते हैं।