Udaipur-Salumber के 5,743 विद्यार्थी जाएंगे फील्ड विजिट पर, पीएम श्री हरित विद्यालय योजना में सीखेंगे पर्यावरण संरक्षण के गुर
30 पीएम श्री स्कूलों के विद्यार्थी नर्सरी, उद्यान और नगर निकायों का करेंगे भ्रमण; उदयपुर के 4,381 और सलूंबर के 1,362 विद्यार्थी होंगे शामिल
जीवीआई नेटवर्क। अब सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी सिर्फ किताबों में पर्यावरण संरक्षण नहीं पढ़ेंगे, बल्कि प्रकृति के बीच जाकर इसे समझेंगे। पीएम श्री हरित विद्यालय योजना 2026-27 के तहत उदयपुर और सलूंबर जिले के 5,743 विद्यार्थी फील्ड विजिट पर जाएंगे। इस दौरान विद्यार्थी पौधों की देखभाल, हरियाली का महत्व और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों को करीब से समझेंगे।
राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के तहत उदयपुर जिले के 22 पीएम श्री विद्यालयों के 4,381 विद्यार्थी और सलूंबर जिले के 8 विद्यालयों के 1,362 विद्यार्थी इस शैक्षणिक भ्रमण में शामिल होंगे।
नर्सरी और उद्यानों में मिलेगी प्रैक्टिकल सीख
समग्र शिक्षा उदयपुर के एडीपीसी कुंज बिहारी भारद्वाज के अनुसार फील्ड विजिट का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता और संवेदनशीलता विकसित करना है। इसके तहत विद्यार्थियों को पौधशालाओं (नर्सरी), नगर निगम, नगर पालिका कार्यालयों और उद्यानों का भ्रमण कराया जाएगा।
इस दौरान विद्यार्थी पौधों की देखभाल, हरित क्षेत्र के महत्व और स्थानीय स्तर पर पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को प्रत्यक्ष रूप से देख सकेंगे।
READ MORE : कभी गांव के मैदान में खेलती थीं, आज पहनती हैं India की Jersey, पढ़िए आदिवासी बेटियों की प्रेरक कहानी
कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थी होंगे शामिल
योजना के तहत कक्षा 1 से 5 को छोड़कर कक्षा 6 से 8 तक के सभी विद्यार्थियों को फील्ड विजिट में शामिल किया जाएगा। वहीं कक्षा 9 से 12 में प्रत्येक कक्षा से 20-20 विद्यार्थियों का चयन संस्था प्रधान द्वारा किया जाएगा।
उदयपुर को 21.905 लाख, सलूंबर को 6.810 लाख का बजट
प्रभारी एपीसी राजेंद्र प्रसाद नायक के अनुसार उदयपुर जिले के लिए 21.905 लाख रुपए और सलूंबर जिले के लिए 6.810 लाख रुपए का बजट आवंटित किया गया है। बजट के अनुसार दोनों जिलों के चयनित पीएम श्री विद्यालयों को राशि की लिमिट जारी कर दी गई है।
पीएम श्री हरित विद्यालय योजना के माध्यम से विद्यार्थियों को कक्षा से बाहर निकलकर प्रकृति के बीच सीखने का अवसर मिलेगा। इससे मेवाड़ क्षेत्र के विद्यार्थियों में हरित विद्यालय, पर्यावरण संरक्षण और इको-सिस्टम को लेकर व्यावहारिक समझ विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।