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Saturday, October 3, 2026
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World Heart Day 2026 : 40 की उम्र से पहले ही दिल दे रहा धोखा ! बढ़ रहे हार्ट अटैक के मामले, ये आदतें हैं जिम्मेदार

Heart Day

world heart day 2026 से पहले बदलती लाइफस्टाइल को लेकर चिंता बढ़ी है। एमबी अस्पताल में हर माह 300-350 हार्ट अटैक मरीज पहुंचने का दावा है। विशेषज्ञों ने धूम्रपान, फास्ट फूड, तनाव, नींद और एक्सरसाइज की कमी को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी है।

जीवीआई नेटवर्क। सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक मोबाइल स्क्रीन, घंटों कुर्सी पर बैठकर काम, फास्ट फूड, तनाव और देर रात तक जागने की आदत... आज की यह दिनचर्या भले ही सामान्य लगती हो, लेकिन लंबे समय में इसका असर हृदय स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। विश्व हृदय दिवस 2026 से पहले उदयपुर के विशेषज्ञों ने बदलती जीवनशैली को लेकर लोगों को सतर्क किया है।

एमबी अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष एवं हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. मुकेश शर्मा के अनुसार, उदयपुर के एमबी अस्पताल में हर महीने करीब 300 से 350 हार्ट अटैक के मरीज पहुंच रहे हैं। उनके अनुसार इनमें लगभग 65 प्रतिशत पुरुष और 35 प्रतिशत महिलाएं हैं तथा बड़ी संख्या में मरीज 40 वर्ष से कम उम्र के हैं। डॉक्टर इसे जीवनशैली से जुड़े जोखिमों के संदर्भ में गंभीरता से लेने की जरूरत बताते हैं।

विश्व हृदय दिवस हर वर्ष 29 सितंबर को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में विश्व हृदय महासंघ का अभियान ‘Don't Miss a Beat’ लोगों को हृदय रोग के संकेतों को नजरअंदाज नहीं करने और हृदय स्वास्थ्य के लिए समय रहते कदम उठाने का संदेश दे रहा है।

घंटों बैठे रहना भी बन रहा बड़ी समस्या

डॉ. शर्मा के अनुसार, दिल की सेहत को प्रभावित करने वाले प्रमुख जीवनशैली संबंधी जोखिमों में धूम्रपान, तंबाकू और शराब का सेवन, असंतुलित खान-पान, तनाव, देर रात तक जागना और शारीरिक गतिविधि की कमी शामिल हैं।

आज समस्या सिर्फ एक्सरसाइज न करने तक सीमित नहीं है। ऑफिस में घंटों बैठकर काम करना, वाहन पर अत्यधिक निर्भरता, खाली समय में लगातार मोबाइल या अन्य स्क्रीन देखना और दिन का अधिकांश हिस्सा निष्क्रिय रहना भी शारीरिक सक्रियता को कम कर देता है।


Heart Day

‘काम पहले, नींद बाद में’ का ट्रेंड दिल पर भारी

युवाओं में देर रात तक काम, पढ़ाई, सोशल मीडिया या मोबाइल इस्तेमाल करने की आदत बढ़ी है। कई लोग नींद को अपनी दिनचर्या का सबसे पहले कम किया जाने वाला हिस्सा मान लेते हैं।

लेकिन स्वस्थ जीवनशैली में पर्याप्त नींद, नियमित शारीरिक गतिविधि और संतुलित भोजन महत्वपूर्ण हैं। लगातार तनाव के साथ धूम्रपान, शराब, जंक फूड और अनियमित नींद जैसी आदतें जुड़ जाएं तो जीवनशैली और भी असंतुलित हो सकती है।

पिज्जा-बर्गर से लेकर पैकेट फूड तक बढ़ी निर्भरता

फास्ट फूड और अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ अब कई लोगों की नियमित डाइट का हिस्सा बन चुके हैं। पिज्जा, बर्गर, तला हुआ भोजन, पैकेटबंद स्नैक्स और मीठे पेय का बार-बार सेवन संतुलित आहार की जगह नहीं ले सकता।

दिल की सेहत के लिए रोज के भोजन में फल, हरी सब्जियां, दालें, साबुत अनाज और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देना जरूरी है। अत्यधिक नमक, चीनी और प्रोसेस्ड फूड का सेवन सीमित करना भी महत्वपूर्ण है।

दिल के लिए जिम ही नहीं, रोज की एक्टिविटी भी जरूरी

हृदय को स्वस्थ रखने के लिए शुरुआत हमेशा कठिन एक्सरसाइज से करना जरूरी नहीं है। पैदल चलना, साइकिल चलाना, तैरना, योग, सीढ़ियों का इस्तेमाल करना और रोजमर्रा की गतिविधियों को बढ़ाना भी शारीरिक सक्रियता बढ़ाने के तरीके हैं।

विश्व हृदय महासंघ के 2026 अभियान में भी सितंबर के दौरान रोज 20 मिनट की शारीरिक गतिविधि को बढ़ावा दिया जा रहा है। अभियान में चलना, साइकिल चलाना, खेलना और अन्य गतिविधियों को हृदय स्वास्थ्य के लिए उपयोगी कदम के रूप में बताया गया है।

दिल को स्वस्थ रखने के लिए क्या बदलें?

इन आदतों से बचें—

  • धूम्रपान और तंबाकू
  • बार-बार फास्ट फूड का सेवन
  • अधिक मीठे और शर्करा युक्त पेय
  • देर रात तक जागना
  • लगातार कई घंटे बैठे रहना
  • लंबे समय तक तनाव को नजरअंदाज करना

इन आदतों को दिनचर्या में शामिल करें—

  • रोजाना शारीरिक गतिविधि
  • संतुलित और पौष्टिक भोजन
  • पर्याप्त नींद
  • पर्याप्त पानी
  • तनाव कम करने के स्वस्थ तरीके
  • रक्तचाप, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच
Madhulika Singh
Written by

Madhulika Singh

Madhulika Singh has been actively involved in journalism for nearly 21 years. She began her journalistic career with Udaipur-based evening daily Aprahan Times. Soon after, she was selected by Dainik Bhaskar and served with its Jodhpur edition for three years. She then joined Rajasthan Patrika in Udaipur, where she worked for nearly 17 years. Her long association with the organisation came to an end in 2025. Madhulika is now working as an independent journalist. She also contributes to Lakecity Update and Rajasthan Today, continuing her work in journalism with a focus on meaningful, credible and people-centric stories.

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