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Saturday, October 3, 2026
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अगर आपके बच्चे भी पिज्जा-बर्गर खाते हैं तो हो जाइए सावधान!

अगर आपके बच्चे भी पिज्जा-बर्गर खाते हैं तो हो जाइए सावधान!

जीवीआई नेटवर्क। यह खबर किसी एक परिवार की त्रासदी नहीं है, यह पूरे समाज के लिए अलार्म बेल है। हाल ही में दिल्ली में 11वीं कक्षा की एक छात्रा की मौत ने यह साफ कर दिया कि पिज्जा, बर्गर, फ्रेंच फ्राइज और

जीवीआई नेटवर्क। यह खबर किसी एक परिवार की त्रासदी नहीं है, यह पूरे समाज के लिए अलार्म बेल है। हाल ही में दिल्ली में 11वीं कक्षा की एक छात्रा की मौत ने यह साफ कर दिया कि पिज्जा, बर्गर, फ्रेंच फ्राइज और कोल्ड ड्रिंक अब सिर्फ “जंक फूड” नहीं रहे, बल्कि धीरे-धीरे जानलेवा आदत बनते जा रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, अत्यधिक फास्ट फूड सेवन से शरीर में हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक, फैटी लिवर, ब्लड क्लॉटिंग और अचानक कार्डियक अरेस्ट का खतरा कई गुना बढ़ जाता है—वह भी कम उम्र में।
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भारत में 10 से 19 वर्ष के बच्चों में मोटापा पिछले 15 वर्षों में तीन गुना बढ़ा

शहरी इलाकों में हर 2 में से 1 किशोर हफ्ते में कम से कम 2 बार जंक फूड खा रहा है। शहरी भारत में हर 3 में से 1 बच्चा हफ्ते में 2–3 बार जंक फूड खा रहा है।
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, जरूरत से ज्यादा नमक और फैट लेने से कम उम्र में हार्ट डिजीज का खतरा 30–40 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। डॉक्टरों की रिपोर्ट बताती है कि अब 25 साल से कम उम्र के युवाओं में भी हार्ट अटैक के केस तेजी से बढ़ रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी चीज की अति जानलेवा साबित होती है। आजकल जिस तरह से फास्ट फूड काउंटर्स हर गली—मोहल्ले के आसपास खुल गए हैं और बिना क्वालिटी और हाइजीन के हर चीज बनाई जा रही है, वह सबसे बड़ा डर है। बच्चे ऐसे फास्ट फूड से जल्दी आकर्षित होते हैं। लेकिन, उनके लिए ये आदत खतरनाक सबित हो सकती है।
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बच्चों में अस्वस्थ जीवनशैली बढ़ रही
मदन मोहन राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय के काय चिकित्सा विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ रु​ही जहीर के अनुसार, आजकल छोटे बच्चों में भी हार्ट अटैक, स्ट्रोक और अचानक कार्डियक अरेस्ट जैसी स्थितियां देखने को मिल रही हैं। आयुर्वेद के अनुसार इनका मूल कारण है, अस्वस्थ जीवनशैली (जंक फूड, मोबाइल/टीवी पर ज्यादा समय, व्यायाम की कमी, अनियमित दिनचर्या, अत्यधिक मानसिक तनाव, पढ़ाई का दबाव, मोटापा, मधुमेह, हाई बीपी जैसी समस्याएं जो अब बच्चों में भी बढ़ रही हैं।
डॉ रुही जहीर के अनुसार, बच्चों का आहार — विहार ऐसा हो—

  1. आहार
    • बच्चों को सात्त्विक और पौष्टिक आहार दें – दूध, घी, फल, हरी सब्ज़ियाँ, दलिया, मूंग दाल।
    • जंक फूड, पैकेज्ड फूड, कोल्ड-ड्रिंक्स, ज्यादा तला-भुना और मैदा बिल्कुल कम करें।
    • रोज़ाना आंवला, द्राक्ष (अंगूर), अनार, सेब जैसे फल।
    • भोजन हल्का और पचने योग्य हो, बच्चों पर ज्यादा भोजन का दबाव न डालें।

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  1. दिनचर्या और विहार
    • सुबह जल्दी उठने और हल्की कसरत/खेलकूद की आदत डालें।
    • बच्चों को खुले मैदान में खेलने दें, केवल मोबाइल/टीवी पर न रखें।
    • दिनभर बैठने की बजाय शारीरिक गतिविधियाँ ज़रूरी हैं।
    • रात को समय पर सुलाएँ (नींद 8–10 घंटे जरूरी)।
    • ज्यादा पढ़ाई/स्क्रीन-टाइम से मानसिक तनाव न बढ़ाएँ।
  2. योग और प्राणायाम
    • बच्चे सूर्य नमस्कार, ताड़ासन, भुजंगासन, शवासन जैसे सरल आसन कर सकते हैं।
    • गहरी साँस लेना (डीप ब्रीदिंग), अनुलोम-विलोम बच्चों को मज़ेदार तरीके से सिखाएँ।
    • इससे फेफड़े और हृदय दोनों मज़बूत होते हैं।
  3. आयुर्वेदिक उपचार
    • आंवला, शहद और हल्का च्यवनप्राश (डॉक्टर की सलाह से) बच्चों के हृदय और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए अच्छा है।
    • ताज़ा दूध + ½ चम्मच घी + 1 इलायची – मस्तिष्क और हृदय को बल देता है।
    • गुनगुना पानी पिलाने की आदत डालें।
  4. मानसिक स्वास्थ्य
    • बच्चों में प्रतिस्पर्धा और तनाव कम करें।
    • खेल, संगीत, चित्रकला जैसी गतिविधियों को प्रोत्साहित करें।
    • घर का वातावरण शांत और सकारात्मक हो।

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सिर्फ दिल्ली नहीं कई जगह से सामने आ चुके मामले —

— पुणे में 14 साल के छात्र को कार्डियक अरेस्ट, रोज़ पिज्जा-बर्गर खाने की आदत

— चेन्नई में 17 साल के किशोर में फैटी लिवर, रोज़ाना कोल्ड ड्रिंक और जंक फूड

— गुजरात में 16 साल की बच्ची को हार्मोनल डिसऑर्डर, लगातार फास्ट फूड सेवन

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माता-पिता के लिए जरूरी सलाह —

— बच्चे के खाने पर नियंत्रण को प्यार नहीं, जिम्मेदारी समझें

— बाहर का खाना रोज़मर्रा नहीं, महीने में 1–2 बार तक सीमित करें

— घर में कोल्ड ड्रिंक, पैकेट स्नैक्स की नो-स्टॉक पॉलिसी अपनाएं

— स्कूल टिफिन में घर का खाना—यह सबसे सस्ती हेल्थ इंश्योरेंस है

— बच्चों के साथ बैठकर खाएं, यह आदतें सुधारने का सबसे असरदार तरीका है
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बच्चों को जंक फूड से ऐसे रखें दूर —

— हेल्दी खाने को “बोरिंग” नहीं, कूल और स्मार्ट बनाकर पेश करें

— मोबाइल स्क्रीन कम, खेल और फिजिकल एक्टिविटी ज्यादा

— बच्चों को यह समझाएं कि सेहत कोई ऑप्शन नहीं, बेसिक रिक्वायरमेंट है

Madhulika Singh
Written by

Madhulika Singh

Madhulika Singh has been actively involved in journalism for nearly 21 years. She began her journalistic career with Udaipur-based evening daily Aprahan Times. Soon after, she was selected by Dainik Bhaskar and served with its Jodhpur edition for three years. She then joined Rajasthan Patrika in Udaipur, where she worked for nearly 17 years. Her long association with the organisation came to an end in 2025. Madhulika is now working as an independent journalist. She also contributes to Lakecity Update and Rajasthan Today, continuing her work in journalism with a focus on meaningful, credible and people-centric stories.

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