दिवाली और वेडिंग सीजन के बीच उदयपुर में ड्राई फ्रूट्स की कीमतें बढ़ रही हैं। कारोबारियों के अनुसार, आयातित माल आने में देरी और अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों से पिस्ता, बादाम और अंजीर के भाव प्रभावित हुए हैं।
GVI NETWORK. दिवाली पर मिठाइयों और ड्राई फ्रूट्स के गिफ्ट पैक देने की परंपरा इस बार महंगाई के असर में है। पश्चिम एशिया में तनाव, अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों में अनिश्चितता और आयातित माल की आपूर्ति में देरी के बीच उदयपुर के बाजार में कई तरह के मेवों की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। पिस्ता, अंजीर, मुनक्का और छुहारे की कीमतों पर खास नजर है, जबकि बादाम और काजू के भाव भी ग्राहकों के बजट को प्रभावित कर रहे हैं।
ड्राई फ्रूट्स कारोबारियों के अनुसार, पहले विदेशों से माल आने में 15 से 20 दिन लगते थे, लेकिन अब कुछ खेपों की आपूर्ति में दो महीने तक का समय लग रहा है। हालांकि, अलग-अलग देशों से आने वाले उत्पादों और व्यापार मार्गों पर इसका असर अलग-अलग हो सकता है। इसके बावजूद दिवाली और आगामी शादी-ब्याह के सीजन को देखते हुए बाजार में ग्राहकी बनी हुई है।
पिस्ता के भाव में तेजी, आयात पर निर्भरता बड़ा कारण
पिस्ता की कीमतों में तेजी के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार में उपलब्धता, आयात लागत और परिवहन व्यवस्था जैसे कारण महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। ईरान, अमेरिका और तुर्की पिस्ता के प्रमुख उत्पादक देशों में शामिल हैं। पश्चिम एशिया में तनाव और व्यापार मार्गों को लेकर अनिश्चितता के कारण आयातकों को माल की उपलब्धता और परिवहन लागत पर नजर रखनी पड़ रही है। कारोबारियों के अनुसार, पिछले साल की तुलना में पिस्ता के भाव में करीब 400 रुपए प्रति किलो तक का अंतर आया है। पिस्ता की उपलब्धता में कमी आने पर कीमतों में तेजी से बदलाव हो सकता है। इसके अलावा अमेरिकी पिस्ता की कीमतों पर डॉलर की विनिमय दर और अंतरराष्ट्रीय मांग का भी असर पड़ता है।
मुनक्का और छुहारे की कीमतों पर भी दबाव
मुनक्का और छुहारे की आपूर्ति के लिए अफगानिस्तान, पाकिस्तान और अन्य उत्पादक क्षेत्रों से आने वाले माल की उपलब्धता महत्वपूर्ण है। कारोबारियों के अनुसार, सड़क मार्ग से आने वाले कुछ उत्पादों की आपूर्ति प्रभावित होने और वैकल्पिक मार्गों से माल मंगाने की स्थिति में परिवहन लागत बढ़ सकती है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आने वाले सूखे मेवों की आपूर्ति में व्यवधान होने पर मुनक्का, छुहारा, पिस्ता और अखरोट जैसी कुछ किस्मों के बाजार भाव प्रभावित हो सकते हैं। कारोबारियों के अनुसार, कुछ उत्पादों की कीमतों में पहले 10 से 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई थी, जबकि कुछ मामलों में यह अंतर 20 से 25 प्रतिशत तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, इन बढ़ोतरी के आंकड़ों की उत्पादवार पुष्टि जरूरी है। सर्दियों और शादी-ब्याह के सीजन में मुनक्का, बादाम और किशमिश की मांग भी बढ़ जाती है। ऐसे में यदि आपूर्ति सीमित रहती है, तो कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।
अंजीर की कीमतों में भी तेजी
अंजीर का आयात अफगानिस्तान, ईरान और तुर्की सहित विभिन्न देशों से होता है। उत्पादन, गुणवत्ता, परिवहन और आयात लागत में बदलाव का असर इसके भाव पर पड़ सकता है। कारोबारियों के अनुसार, अंजीर की कीमतों में भी उल्लेखनीय अंतर देखने को मिल रहा है। अफगानिस्तान में मौसम और बारिश से उत्पादन प्रभावित होने की स्थिति में वहां से आने वाले अंजीर की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है। वहीं, पश्चिम एशिया में तनाव और अंतरराष्ट्रीय व्यापार की अनिश्चितता के कारण आयातकों को वैकल्पिक आपूर्ति व्यवस्था पर भी विचार करना पड़ सकता है।
काजू के भाव में तेजी के पीछे कारण
काजू की कीमतों पर कच्चे माल की उपलब्धता, प्रोसेसिंग लागत और अंतरराष्ट्रीय मांग का असर पड़ता है। भारत में कच्चे काजू का आयात आइवरी कोस्ट, तंजानिया और मोजाम्बिक जैसे अफ्रीकी देशों से भी किया जाता है। इन क्षेत्रों में उत्पादन और निर्यात की स्थिति भारतीय बाजार को प्रभावित कर सकती है।
इसके अलावा वियतनाम जैसे देशों की प्रोसेसिंग क्षमता और अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा भी काजू के कारोबार को प्रभावित करती है। कारोबारियों के अनुसार, कच्चे माल की उपलब्धता में कमी और प्रोसेसिंग लागत बढ़ने से तैयार काजू के भाव में तेजी आ सकती है।
खजूर की सप्लाई पर भी नजर
दिवाली के दौरान ड्राई फ्रूट्स के साथ खजूर की भी मांग रहती है। भारत में खजूर का आयात सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, ईरान और अन्य उत्पादक देशों से होता है। खाड़ी क्षेत्र में तनाव और समुद्री व्यापार मार्गों में संभावित बाधाओं के कारण आयातित माल की आपूर्ति और परिवहन लागत प्रभावित हो सकती है।
खजूर की अलग-अलग किस्मों के भाव उनकी गुणवत्ता और मूल देश के अनुसार अलग होते हैं। सऊदी अरब की अजवा, कलमी, मबरूम और सफावी जैसी किस्मों की मांग रहती है। हालांकि, खजूर की कीमतों में वास्तविक बढ़ोतरी और आपूर्ति में देरी की स्थिति की पुष्टि स्थानीय कारोबारियों से की जानी चाहिए।
उदयपुर में ड्राई फ्रूट्स की कीमतें —
काजू — 900 से 1800 रुपए तक
दाख इंडियन — 400 से 700 रुपए तक
बादाम अमेरिकन — 1000 से 1400 रुपए तक
बादाम सनोरा — 1400 से 1800 रुपए तक
बादाम मामरा — 2800 से 6000 रुपए तक
पिस्ता ईरानी (रोस्टेड) — 1900 से 2400 रुपए तक
पिस्त्ता ईरानी गिरी — 2800 से 3500 रुपए तक
पिस्ता पिशोरी — 4200 से 4600 रुपए तक
अंजीर — 1000 से 3000 रुपए तक
मुनक्का — 600 से 1400 रुपए तक
दाख कंधारी — 600 से 1200 रुपए तक
दाख सुंदेखनी — 800 से 1800 रुपए तक
काली दाख — 500 से 1200 रुपए तक
काली दाख (उज़्बेकिस्तान) — 1200 से 1500 रुपए तक
अखरोट — 700 से 900 तक रुपए तक
अखरोट गिरी — 1200 से 2000 रुपए तक
खजूर सऊदी — 400 से 1600 रुपए तक
चिलगोजा — 4000 से 5000 रुपए तक
चिलगोजा गिरी — 5000 से 7000 रुपए तक
कारोबारियों के अनुसार, दिवाली तक बनी रह सकती है तेजी
दिवाली और गल्फ देशों में तनाव के कारण ड्राई फ्रूट्स की कीमतों में तेजी बनी हुई है। दिवाली तक भाव ऊंचे रहने की संभावना है। इसके बावजूद बाजार में अच्छी खरीदारी हो रही है। दिवाली के बाद वेडिंग सीजन शुरू होने से मांग बनी रहने की उम्मीद है। पिस्ता, बादाम और अंजीर की कीमतों में सबसे ज्यादा उछाल देखने को मिल रहा है।
— अनिल मेहता, अध्यक्ष, किराणा एवं ड्राई फ्रूट्स एसोसिएशन
अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और गल्फ देशों में तनाव का असर ड्राई फ्रूट्स की कीमतों पर पड़ा है। पिछले साल की तुलना में पिस्ता करीब 400 रुपए प्रति किलो और बादाम लगभग 150 रुपए प्रति किलो तक महंगा हुआ है। हालांकि, दिवाली को देखते हुए बाजार में ग्राहकों की अच्छी खरीदारी हो रही है।
— मनोहर लाल चेलानी, उपाध्यक्ष, किराणा एवं ड्राई फ्रूट्स एसोसिएशन