Jaljhulani Ekadashi 2026 : शाही ठाठ-बाट से निकलेगी ठाकुरजी की रामरेवाड़ी, पिछोला में होगा नवनीर स्नान
उदयपुर में जलझूलनी एकादशी पर मंगलवार को ठाकुरजी की रामरेवाड़ियां शाही लवाजमे के साथ निकलेंगी। जगदीश मंदिर से निकलने वाली रामरेवाड़ी पिछोला के गणगौर घाट पहुंचेगी, जहां शालिग्रामजी का अभिषेक और नवनीर स्नान होगा। शहर में झांकियां, अखाड़ा प्रदर्शन, करतब और ढोल-नगाड़े आकर्षण का केंद्र रहेंगे।
जीवीआई नेटवर्क। झीलों की नगरी उदयपुर मंगलवार को भक्ति, परंपरा और उल्लास के रंग में रंगी नजर आएगी। जलझूलनी एकादशी के अवसर पर शहर के प्रमुख मंदिरों से ठाकुरजी की रामरेवाड़ियां शाही लवाजमे के साथ निकलेंगी। सजी-धजी पालकियों और झांकियों में विराजमान भगवान की छवियों को जलस्रोतों के घाटों तक ले जाया जाएगा, जहां विधि-विधान से नवनीर स्नान और पूजा-अर्चना होगी। रामरेवाड़ियों के साथ अखाड़ों के प्रदर्शन, पारंपरिक करतब, झांकियां और ढोल-नगाड़े इस धार्मिक आयोजन को और भव्य बनाएंगे। पर्व को लेकर मंदिरों में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। शहर के विभिन्न हिस्सों से निकलने वाली रामरेवाड़ियों के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के उमड़ने की संभावना है।
जलझूलनी एकादशी का धार्मिक महत्व
भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी को जलझूलनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। इसे पद्मा एकादशी, डोल ग्यारस और परिवर्तिनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में शयन के दौरान करवट बदलते हैं।
इस पर्व से जलवा पूजन, सूरज पूजन और कुआं पूजन जैसी परंपराएं भी जुड़ी हुई हैं। कई स्थानों पर भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा या शालिग्रामजी को सुसज्जित कर जलस्रोत तक ले जाया जाता है। वहां भगवान को जल स्नान करवाकर पूजा-अर्चना की जाती है।
उदयपुर में भी वर्षों से चली आ रही इसी परंपरा के तहत विभिन्न मंदिरों से ठाकुरजी की रामरेवाड़ियां निकाली जाती हैं।
जगदीश मंदिर से दोपहर बाद निकलेगी रामरेवाड़ी

शहर की प्रमुख रामरेवाड़ियों में जगदीश मंदिर की रामरेवाड़ी विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगी। मंदिर से दोपहर 3 बजे बाद भगवान जगन्नाथ स्वामी की छवि को चांदी की पालकी में विराजित कर रामरेवाड़ी निकाली जाएगी।
रामरेवाड़ी जगदीश चौक से होते हुए पिछोला झील स्थित गणगौर घाट पहुंचेगी। यहां वैदिक मंत्रोच्चार के बीच शालिग्रामजी का अभिषेक और नवनीर स्नान कराया जाएगा। इसके बाद भोग, पूजा-अर्चना और महाआरती होगी।
रामरेवाड़ी में अखाड़ों के सदस्य और बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होंगे। यात्रा के दौरान ढोल-नगाड़ों की गूंज और पारंपरिक प्रस्तुतियां शहर के माहौल को भक्तिमय बनाएंगी।
अस्थल और मीठारामजी मंदिर से भी निकलेगी रामरेवाड़ी
जलझूलनी एकादशी पर अस्थल मंदिर और मीठारामजी मंदिर सहित शहर के अन्य प्रमुख मंदिरों से भी ठाकुरजी की रामरेवाड़ियां निकाली जाएंगी।
भगवान की छवियों को सजी-धजी पालकियों और झांकियों में विराजित कर श्रद्धालु जलस्रोतों के घाटों तक पहुंचेंगे। यहां ठाकुरजी का नवनीर स्नान करवाने के बाद पूजा-अर्चना की जाएगी। धार्मिक अनुष्ठान पूरे होने के बाद रामरेवाड़ियां वापस मंदिरों की ओर लौटेंगी।
आयड़ में गंगोद्भव कुंड पहुंचेगी रामरेवाड़ी
आयड़ क्षेत्र के विभिन्न मंदिरों से निकलने वाली रामरेवाड़ियां गंगोद्भव कुंड पहुंचेगी। यहां ठाकुरजी को स्नान करवाकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाएगी।
रामरेवाड़ियों के आयोजन को लेकर क्षेत्र में विशेष धार्मिक माहौल रहेगा। स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ बड़ी संख्या में शहरवासी भी इन आयोजनों में शामिल होंगे।
झांकियों और अखाड़ों के प्रदर्शन पर रहेगी नजर
जलझूलनी एकादशी की रामरेवाड़ियों में धार्मिक झांकियों के साथ अखाड़ों का प्रदर्शन और पारंपरिक करतब भी देखने को मिलेंगे। ढोल-नगाड़ों और भक्ति गीतों के बीच निकलने वाली रामरेवाड़ियां शहर की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा की झलक पेश करेंगी।विभिन्न समाजों की ओर से भी रामरेवाड़ियां निकाली जाएंगी। इससे शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में पूरे दिन धार्मिक उत्सव जैसा माहौल रहने की संभावना है। पूरे मार्ग में बेवाण पर गुलाल और पुष्प वर्षा होती रहेगी। नवनीर स्नान के बाद ठाकुरजी के कपड़े बदलकर फिर से शोभायात्रा मंदिर पहुंचेगी। इस दौरान छौगाला छैल के जयकारे गूंजेंगे।
झीलों के शहर में जलझूलनी की खास छटा
उदयपुर में जलझूलनी एकादशी का महत्व इसलिए भी खास हो जाता है क्योंकि यहां ठाकुरजी की रामरेवाड़ियां झीलों और पारंपरिक जलस्रोतों के घाटों तक पहुंचती हैं। पिछोला के गणगौर घाट और आयड़ के गंगोद्भव कुंड पर होने वाले धार्मिक अनुष्ठान इस पर्व को उदयपुर की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान से जोड़ते हैं। भक्ति, परंपरा और झीलों की खूबसूरती के बीच जलझूलनी एकादशी पर उदयपुर एक बार फिर अपनी सदियों पुरानी धार्मिक विरासत का साक्षी बनेगा।