Diwali 2026: 8 नवंबर को मनेगी दिवाली, जानिए लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त, धनतेरस से भाई दूज तक पूरा कैलेंडर
दिवाली 2026 इस बार 8 नवंबर को मनाई जाएगी। धनतेरस से शुरू होने वाले पांच दिवसीय दीपोत्सव में नरक चतुर्दशी, लक्ष्मी पूजन, गोवर्धन पूजा और भाई दूज की तारीखें जानिए। उदयपुर में लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त और पूरा कैलेंडर यहां देखें।
GVI NETWORK। दीपों का पर्व दीपावली नजदीक आते ही घरों और बाजारों में तैयारियां शुरू हो गई हैं। रोशनी, खुशियों और समृद्धि का प्रतीक दिवाली इस वर्ष 8 नवंबर, रविवार को मनाई जाएगी। पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत 6 नवंबर को धनतेरस से होगी और इसका समापन 11 नवंबर को भाई दूज के साथ होगा। इस दौरान धनतेरस, रूप चौदस, नरक चतुर्दशी, लक्ष्मी पूजन, गोवर्धन पूजा और भाई दूज जैसे प्रमुख पर्व मनाए जाएंगे।
इस बार पंचांग की तिथियों के विशेष संयोग के कारण नरक चतुर्दशी और मुख्य दीपावली एक ही दिन पड़ रही हैं। ऐसे में लोगों के बीच छोटी और बड़ी दिवाली की तारीख को लेकर भी उत्सुकता है। आइए जानते हैं दिवाली 2026 की सही तारीख, लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त और पांच दिवसीय दीपोत्सव का पूरा कैलेंडर।

दिवाली 2026 कब है? जानिए लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक अमावस्या पर दीपावली मनाई जाती है। इस वर्ष 8 नवंबर को कार्तिक अमावस्या होने से इसी दिन मुख्य दीपावली और मां लक्ष्मी का पूजन किया जाएगा।
उदयपुर के पंचांग के अनुसार लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त शाम 6 बजकर 3 मिनट से रात 7 बजकर 59 मिनट तक रहेगा। वहीं प्रदोष काल शाम 5 बजकर 40 मिनट से रात 8 बजकर 17 मिनट तक रहेगा।
इस दौरान मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की जाएगी। मान्यता है कि प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजन करने से घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है।
दिवाली 2026: धनतेरस से भाई दूज तक पूरा कैलेंडर
6 नवंबर, शुक्रवार : धनतेरस
पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत धनतेरस से होगी। इस दिन भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और कुबेर की पूजा की जाती है। मान्यता के अनुसार इस दिन सोना, चांदी, बर्तन और नई वस्तुओं की खरीदारी करना शुभ माना जाता है। शाम को घरों में दीपदान की परंपरा भी निभाई जाती है।
7 नवंबर, शनिवार : रूप चौदस और यमदीपदान
रूप चौदस को छोटी दिवाली के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन सौंदर्य और आरोग्य की कामना से उबटन और पारंपरिक स्नान की परंपरा निभाई जाती है। कई परंपराओं में शाम को यमराज के निमित्त दीपदान किया जाता है। इसे यमदीपदान भी कहते हैं।
8 नवंबर, रविवार : नरक चतुर्दशी और मुख्य दिवाली
इस बार नरक चतुर्दशी का अभ्यंग स्नान और मुख्य दिवाली एक ही दिन पड़ रहे हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध कर लोगों को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई थी।
शाम को कार्तिक अमावस्या में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश का पूजन किया जाएगा। घरों, मंदिरों और प्रतिष्ठानों में दीप जलाकर सुख-समृद्धि की कामना की जाएगी। बाजारों और घरों में रोशनी, रंगोली और सजावट के साथ दीपोत्सव का उल्लास दिखाई देगा।
10 नवंबर, मंगलवार : गोवर्धन पूजा और अन्नकूट
दिवाली के बाद गोवर्धन पूजा और अन्नकूट उत्सव मनाया जाएगा। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा करने की स्मृति में पूजा की जाती है। मंदिरों में विभिन्न प्रकार के पकवानों का भोग लगाया जाता है, जिसे अन्नकूट कहा जाता है।
11 नवंबर, बुधवार : भाई दूज
पांच दिवसीय दीपोत्सव का समापन भाई दूज के साथ होगा। इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र, सुख और समृद्धि की कामना करती हैं। यह पर्व भाई-बहन के प्रेम और विश्वास के रिश्ते का प्रतीक है।
दिवाली पर क्यों की जाती है मां लक्ष्मी और गणेश की पूजा?

हिंदू मान्यताओं में मां लक्ष्मी को धन, वैभव और समृद्धि की देवी माना गया है, जबकि भगवान गणेश को बुद्धि, विवेक और शुभ कार्यों के आरंभ का देवता माना जाता है। दिवाली की शाम दोनों की एक साथ पूजा करने की परंपरा है।
मान्यता है कि दीपावली की रात मां लक्ष्मी घरों में आगमन करती हैं। इसी कारण लोग घरों की साफ-सफाई करते हैं, मुख्य द्वार पर रंगोली बनाते हैं और दीप जलाकर देवी लक्ष्मी का स्वागत करते हैं।
इस दिवाली घरों में दिखेगी रोशनी और सजावट की रौनक
दिवाली के अवसर पर घरों में मिट्टी के दीये, रंग-बिरंगी लाइट्स, फूलों की सजावट और रंगोली बनाने की परंपरा है। वहीं बाजारों में मिठाइयों, उपहारों, सजावटी सामान और पूजन सामग्री की खरीदारी भी बढ़ जाती है।
पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए इस बार प्राकृतिक सामग्री से बने दीये, गोबर के दीपक और हस्तनिर्मित सजावटी उत्पादों को भी प्राथमिकता दी जा सकती है। इस तरह दीपावली का पर्व परंपरा, खुशियों और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का संदेश देता है।