Karwa Chauth 2026: अखंड सौभाग्य और सुख-समृद्धि के लिए सुहागिनें रखेंगी व्रत, जानें चंद्रोदय का समय
करवा चौथ पर सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य के लिए निर्जला व्रत रखेंगी। जानिए करवा चौथ की चतुर्थी तिथि, उदयपुर में चंद्रोदय का समय, पूजा-विधि और भद्राकाल से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी।
GVI NETWORK. पति की लंबी आयु, सुखी वैवाहिक जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना के साथ सुहागिन महिलाएं करवा चौथ का व्रत रखती हैं। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व धार्मिक आस्था और पारंपरिक रीति-रिवाजों का प्रतीक है। इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखकर शाम को करवा माता की पूजा करती हैं और चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोलती हैं। पं. मनीष दिवाकर के अनुसार चंद्रोदय शाम 8:39 बजे होने का अनुमान है।

Karwa Chauth 2026 Date: करवा चौथ की तिथि और चंद्रोदय का समय
पं. मनीष दिवाकर के अनुसार, चतुर्थी तिथि 29 अक्टूबर को रात्रि 1:06 बजे से शुरू होकर उसी दिन रात्रि 10:09 बजे तक रहेगी। चंद्रमा के दर्शन शाम 8:39 बजे होने की संभावना है। करवा चौथ पर महिलाएं दिनभर निर्जला व्रत रखती हैं। शाम को विधि-विधान से पूजा-अर्चना और व्रत कथा सुनने के बाद चंद्रमा के उदय होने की प्रतीक्षा की जाती है। चंद्रदर्शन के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर पति की लंबी आयु, परिवार की सुख-समृद्धि और दांपत्य जीवन में खुशहाली की कामना की जाती है।
Karwa Chauth Puja: भद्राकाल को लेकर क्या है स्थिति?
करवा चौथ के अवसर पर भद्राकाल की स्थिति को लेकर भी श्रद्धालुओं के बीच सवाल उठते हैं। उपलब्ध पंचांग विवरण के अनुसार, भद्राकाल 28 अक्टूबर को दोपहर 2:37 बजे से शुरू होकर रात्रि 1:07 बजे तक बताया गया है।पंचांग के अनुसार, इस दौरान भद्रा के स्वर्ग में रहने का उल्लेख किया गया है। वहीं, 29 अक्टूबर को सूर्योदय से पहले भद्राकाल समाप्त हो जाएगा। इस गणना के अनुसार, करवा चौथ के दिन पूजन और चंद्रदर्शन के समय भद्राकाल नहीं रहेगा।
हालांकि, व्रत और पूजन से जुड़े सटीक मुहूर्त के लिए स्थानीय पंचांग तथा विद्वान ज्योतिषाचार्य से पुष्टि करना उचित रहेगा।

Karwa Chauth Vrat: पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन की कामना
करवा चौथ भारतीय परंपरा में सुहाग, प्रेम और दांपत्य विश्वास से जुड़ा प्रमुख त्योहार है। इस दिन महिलाएं सोलह श्रृंगार कर पूजा की तैयारी करती हैं। कई स्थानों पर महिलाएं सामूहिक रूप से करवा चौथ की कथा सुनती हैं और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा करती हैं।
चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महिलाएं यह व्रत अपने पति की दीर्घायु, परिवार की खुशहाली और अखंड सौभाग्य की कामना से रखती हैं।